केजरीवाल ने मोदी से पूछा ये सवाल, तो जवाब दिया भगवंत मान ने, अब इस नई मुसीबत में फंसे दिल्ली के सीएम

शनिवार को दिल्ली में अन्तर्राज्यीय परिषद की बैठक हुई। बैठक में क्या कुछ फैसला किया गया, इसके बारे में मीडिया में ज्यादा जानकारी नहीं आई। मीडिया में जो जानकारी आई और खबरें बनाकर उसे पेश की गई हैं, वो केजरीवाल से जुड़ी थीं। केजरीवाल के एक बयान ने अन्तर्राज्यीय परिषद से जुड़ी खबरों को लाइम लाइट में ला दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस बैठक में उन्हें मोबाइल ले जाने नहीं दिया गया। केजरीवाल ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर मोदी जी को उनसे क्या खतरा है।

बहरहाल, जाहिर तौर पर जब इस तरह की बैठक होती होगी तो उसमें प्रोटोकॉल का पालन किया जाता होगा। सुरक्षा के लिहाज से ये प्रोटोकॉल बहुत पहले से चले आ रहे होंगे। लेकिन जिस तरीके से केजरीवाल ने इसे मसाला बनाकर पेश कर दिया, उस पर किसी ने रिसर्च करने की कोशिश नहीं की। बल्कि दो गुट तैयार हो गए। केजरीवाल के समर्थक मोदी सरकार को घेरने लगे, जबकि मोदी सरकार के समर्थक केजरीवाल को घेरने लगे। सच तो ये है कि ऐसी खबरों में राजनीति करने की जगह प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए। बैठक में क्या हुआ, उस पर चर्चा करनी चाहिए थी।

केजरीवाल का एकतरफा बयान हर तरफ छाया रहा। किसी ने न इस पर जवाब दिया और न ही तवज्जो। ये जरूर हुआ कि कुछ मीडिया में ये खबरें छप गईं और उनके बयान दिखाए गए। अब देखिए एक हफ्ता भी नहीं गुजरा कि उनके इस आरोप का जवाब उनके ही एक जिम्मेदार सांसद भगवंत मान ने दे दिया।

भगवंत मान आम आदमी पार्टी के सांसद हैं। पार्टी के दिग्गज नेताओं में इनकी गिनती होती है। संसद सदस्य बने दो साल से ज्यादा हो चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने जिस तरीके से मोबाइल से संसद के अंदर की तस्वीरों को शूट किया और इसे सोशल मीडिया पर प्रचारित किया। ये न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि देश की सुरक्षा के साथ एक बड़ा खतरा है।

यकीनन ये वही लोकतंत्र का मंदिर है, जहां आतंकवादियों ने हमला किया। उस समय आतंकवादियों को संसद से जुड़ी चीजों के बारे में इतनी जानकारी नहीं थी। लेकिन आप के सांसद भगवंत मान के इस लाइव वीडियो स्टंट ने सुरक्षा के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है।

हालात यहीं तक सीमित नहीं है। बल्कि जब भगवंत मान से इस बारे में पूछा गया तो बार-बार वो यही कहते रहे कि आगे भी वो ऐसा ही करते रहेंगे। अपने इस स्टंट को सही साबित करने की कोशिश करते रहे। माफी मांगने से इनकार कर दिया। वीडियो के सोशल मीडिया में वायरल होने के एक दिन बाद ही वो माफी मांगने को तैयार हो गए। इस घटना ने कई बातों को स्पष्ट कर दिया है।

इस घटना से केजरीवाल को ये जवाब मिल गया होगा कि क्यों महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए जिम्मेदार लोगों को भी मोबाइल ले जाने में पाबंदी होनी चाहिए।

दूसरा, क्या इस एपिसोड ने ये साबित नहीं कर दिया कि संसद में सांसदों के मोबाइल ले जाने पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए।

तीसरा आप आदमी पार्टी से जुड़ा सवाल है। सवाल ये है कि आप देश की राजनीति बदलने आए थे, लेकिन सच तो ये है कि आप एक बड़ी लापरवाही को अंजाम देने के बाद भी इसे सही ठहराते हैं और पूरी पार्टी आपके पीछे लग जाती है। जब आपको इस भयानक चूक का अंदाजा होता है तो आप माफी मांगकर इस बात की उम्मीद करते हैं कि अब पूरी दुनिया आपको माफ कर दे।

इस एपिसोड के बाद भगवंत मान को ही नहीं बल्कि इनके मुखिया केजरीवाल और पूरी आम आदमी पार्टी को गंभीर मंथन करने की जरूरत है। जरूरत इस बात की भी है कि भगवंत मान का आम आदमी पार्टी के जिन नेताओं ने समर्थन किया, क्या वो भी माफी मांगेंगे।

लेखक हरीश चन्द्र बर्णवाल से उनके ईमेल hcburnwal@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं

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