पाठक से मोदी का परिचय कराती पुस्तक

नई दिल्ली | नरेंद्र मोदी पर अबतक ऐसी कोई किताब नहीं आई है, जिसकी प्रस्तावना स्वयं उन्होंने लिखी हो। ‘मोदी मंत्र’ इस लिहाज से विशेष पुस्तक है।198 पृष्ठ की इस किताब में कुल सात अध्याय हैं। विषय सूची देखकर पहली दृष्टि में साफ हो जाता है कि नरेंद्र मोदी के विचारों को विस्तार से किताब में समाहित किया गया है। वह जीवन दर्शन के बारे में उनके विचार हों या फिर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दर्शन के बारे में।
इस पुस्तक की प्रस्तावना में नरेंद्र मोदी लिखते हैं, “एक शब्द है ‘कर्तव्य’। इसके कई रंगों मंत अर्थ हैं। इसमें से एक का तात्पर्य यह है कि अपनी मातृभूमि के लिए अत्यंत नि:स्वार्थ भावना से कुछ काम करें। यह हमें महान संस्कृति, दूरदर्शिता और जीवन के कई रंगों में महान परंपार के तौर पर मिली है और इसे हम इसी भव्य धरोहर के रूप में अगली पीढ़ी को सौंप पाएंगे।” आगे जो बात उन्होंने प्रस्तावना में लिखी है, वह इन्हीं बातों का विस्तार है।
198 पृष्ठ की इस किताब में कुल सात अध्याय हैं। विषय सूची देखकर पहली दृष्टि में साफ हो जाता है कि नरेंद्र मोदी के विचारों को विस्तार से किताब में समाहित किया गया है। वह जीवन दर्शन के बारे में उनके विचार हों या फिर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दर्शन के बारे में। इस किताब के लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल हैं। पेश से पत्रकार हैं। खोजबीन इनके स्वभाव का हिस्सा है। उसकी छाया किताब पर है। इसे ही आधार बनाकर वे कहते हैं, ‘यदि नरेंद्र मोदी को समझना है तो पहले हर तरह के पूर्वाग्रह से बाहर निकलना होगा।’ हरीश यह भी दावा कर रहे हैं कि इस किताब में ऐसी दर्जनों सच्ची और रोमांचित कर देने वाली घटनाएं मिलेंगी, जिसकी सिर्फ कल्पना की जा सकती है।

किताब में अध्याय नंबर पांच उत्सुक्ता जगाता है। इसमें नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की 101 वजहें गिनाई गई हैं। एक महत्वपूर्ण वजह यह है कि नरेंद्र मोदी हर उम्र के लोगों में सर्वाधिक लोकप्रिय तो हैं ही, इसके साथ-साथ महिलाओं के बीच भी उनकी लोकप्रियता है। ज्यादातर महिलाओं ने मोदी पर ही भरोसा जताया है। राजनीतिक गलियारे में बाडे और विचारों में बंटे राजनेता भी नरेंद्र मोदी में संभावनाएं देख रहे हैं और इनके साथ आने में उन्हें परहेज नहीं है। संदर्भ के साथ ये बातें कही गई हैं। अध्याय के आखिर में संदर्भ दिया हुआ है। इससे किताब की प्रामाणिकता बढ़ जाती है। ‘मोदी मंत्र’ में उन मुद्दों को भी उठाया गया है, जो मुद्दा विवादित है। उस बारूद की तरह है, जिसपर कोई हाथ रखना नहीं चाहता है। ‘जम्मू-कश्मीर: नीति और नजरिया’ अध्याय में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा है, जहां वे इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की बात करते दिखाई देते हैं।

‘इस किताब को पढ़कर जिस नरेंद्र मोदी से पाठक परिचित हो पाता है, वह थोड़ी देर के लिए पहले विस्मित होता है और फिर बहुत देर के लिए आश्चर्यचकित। वह सोचने लगता है कि काश, इन बातों को मैं पहले ही जान पाता। यही इस पुस्तक की विशेषता है।’ जिनके हाथ में यह किताब जा रही है, वे इसे पढ़ने के बाद यही राय बना रहे हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ने लेखक को शुभकामना संदेश में कहा है जिस नरेंद्र मोदी की बतौर मुख्यमंत्री बनाई दुनिया फिलहाल गुजरात की सीमाओं में ही देखी जा सकती है। यह पुस्तक उसकी सीमाओं का विस्तार करती है। उनकी कर्म ख्याति को राज्य की परिधि लांघने में मदद करती है। किताब एस.बी.क्रिएटिव मीडिया से प्रकाशित हुई है। पेपर बैक में इसकी कीमत 200 रुपए है।

सौजन्य – ब्रजेश कुमार झा

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