हरीश चंद्र बर्णवाल की पुस्तक ‘मोदी नीति’ की धमाकेदार लॉन्चिंग

यदि आज प्रेमचंद होते तो यही कहते कि मैं हरीश बर्णवाल में उतर आया हूं – राम बहादुर राय

‘.यदि आज प्रेमचंद होते तो यही कहते कि मैं हरीश बर्णवाल में उतर आया हूं’ यह बात कोई और नहीं बल्कि इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कही है। उन्होंने यह बात किसी और के लिए नहीं बल्कि ‘मोदी नीति’ के लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल के लिए कही है। उनकी इस उक्ति से यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि समारोह तो ‘मोदी नीति’ किताब के लोकार्पण का था, लेकिन इसके लिए आयोजित परिचर्चा का केंद्रबिंदु किताब के लेखक डॉ.हरीश चंद्र बर्णवाल रहे।

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल की किताब “मोदी नीति” का लोकार्पण 6 जुलाई, 2019 को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में किया गया। इस लोकार्पण कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय के साथ इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर श्री राजदीप सरदेसाई, क्विंट के प्रेसिडेंट और एडिटोरियल डायरेक्टर श्री संजय पुगलिया, आज तक के एग्जीक्यूटिव एडिटर श्री सईद अंसारी और न्यूज नेशन के मैनेजिंग एडिटर श्री अजय कुमार के अलावा मानव रचना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. संजय श्रीवास्तव भी शामिल हुए।

पुस्तक विमोचन समारोह की अध्यक्षता श्री राम बहादुर राय ने की। ‘मोदी नीति’ पर अपने अध्यक्षीय संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नए सिरे से समझाने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही राय ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी से हारने के बाद जो लोग सदमे में हैं उन्हें भी यह किताब सदमे से बाहर निकलने में काम देगी।

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने इस परिचर्चा में लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने इस परिचर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 2019 लोकसभा चुनाव की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने ही पहली बार बताया कि इस चुनाव में नरेन्द्र मोदी को 300 से भी अधिक सीटें मिलेंगी। सरदेसाई ने कहा कि इस चुनाव में ईवीएम का सवाल उठाना मोदी की लोकप्रियता के साथ अन्याय करना होगा। इस चुनाव में इतनी बड़ी जीत मोदी की और सिर्फ मोदी की हुई है।

क्विंट के संपादकीय निदेशक संजय पुगलिया ने जहां किताब की प्रशंसा की, वहीं लेखक के प्रयास की भी सराहना की। उन्होंने पीएम मोदी के बारे में कहा कि वे पुरानी चीजों को तोड़ने और नई चीजों को गढ़ने के आदी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि मोदी किसी स्थापित खांचे में रहकर कोई धारणा नहीं बनाते, बल्कि समय और लोगों की धारणा को पहचान कर अपनी कार्यशैली तय करते हैं। इसलिए उनके प्रति बनाई गई हमलोगों की हर धारणा गलत साबित होती रही है।

किताब विमोचन के मौके पर आयोजित परिचर्चा में शिरकत करने वाले आज तक के कार्यकारी संपादक सईद अंसारी का कहना है कि मोदी नीति किताब गंभीर और गहन शोध की परिणति है। उन्होंने लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल से अपने पुराने संबंधों की चर्चा करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने उस समय ‘मोदी के प्रधानमंत्री बनने की 101 वजहें’ नाम से एक लंबा लेख लिखा था, जो सोशल मीडिया में काफी ट्रेंड भी हुआ था, जिस समय मोदी के प्रधानमंत्री बनने की दूर-दूर तक चर्चा भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि आप लोग तो मजबूत विपक्ष की बात तब सुने होंगे जब दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने संसद में कहा। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की संसद में कही बात मोदी नीति किताब में पहले से थी। अंसारी ने कहा कि मोदी नीति में अगर आप भारत के भविष्य को देखते हैं तो आप भारत के अतीत को भी देखते हैं।

वहीं मानव रचना विश्वविद्यालय के कुलपति श्री संजय श्रीवास्तव ने कहा कि मोदी नीति पुस्तक के दूसरे चैप्टर का नाम है – “पौराणिक ग्रंथों से आधुनिक विकास की प्रेरणा लेते ‘राष्ट्रऋषि’ मोदी”। इस चैप्टर में इस नाम को तथ्यों के साथ स्थापित किया गया है। अगर इतिहास नरेंद्र मोदी को राष्ट्रऋषि के नाम से याद करेगा, तो उसे स्थापित करने में डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल की इस पुस्तक ‘मोदी नीति’ की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाएगी।

उन्होंने कहा कि एक अकेडमिशियन होने के नाते मेरा ये मानना है कि हरीश जी की पुस्तक ‘मोदी नीति’ एक रिसर्च पुस्तक की तरह है। जब भी इक्कीसवीं सदी के भारत के इतिहास का लेखन होगा, उसमें ‘मोदी नीति’ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

मोदी नीति पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम के दौरान लेखक ड़ॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल ने अपने स्वयं के उद्बोधन में इस बात का जिक्र किया कि आखिर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर ट्रिलॉजी क्यों लिखी? मोदी नीति पुस्तक का सार क्या है? अपने प्रश्नों का स्वयं जवाब देते हुए लेखक हरीश बर्णवाल ने बताया कि आखिर क्यों वे एक अच्छे खासे चैनल की नौकरी छोड़, पुस्तक लेखन की ओर मुड़ गए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर एक दिलचस्प बात बताई। उन्होंने कहा,
“आज नरेंद्र मोदी सिर्फ एक व्यक्ति का नाम नहीं है,
बल्कि एक युग है – मोदी युग
एक दर्शन है – मोदी दर्शन
एक पीढ़ी है – मोदी की पीढ़ी
एक अलग political culture है – modi culture
एक school of thought है, मोदी school of thought
हालांकि खुद प्रधानमंत्री मोदी जी इसे न्यू इंडिया कहते हैं, लेकिन मैं इसे Modi’s India कहना पसंद करूंगा, यानि मोदी का भारत
और आम लोगों से जुड़े यही सरोकार और संस्कार मिलकर मोदी नीति का स्वरूप बनते हैं”
‘मोदी नीति’ के विमोचन के मौके पर भारी संख्या में श्रोता और पुस्तक प्रेमी पहुंचे। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब का हॉल खचाखच भरा था। इस परिचर्चा में शामिल करीब-करीब हर वक्ता ने डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल की लिखी ‘मोदी नीति’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार और क्रिया का एक तथ्यात्मक दस्तावेज बताया। ‘मोदी नीति’ प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। प्रधानमंत्री मोदी पर लेखक की ये तीसरी किताब है। इससे पहले मोदी मंत्र और मोदी सूत्र के नाम से उनकी दो किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं और ख्याति भी बटोर चुकी हैं।

कार्यक्रम का पूरा वीडियो देखिए –

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*