आप से पांच सवाल

आम आदमी पार्टी की नेशनल एक्जीक्यूटिव ने पीएसी से योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को हटाने का फैसला लोकतांत्रिक तरीके से लिया है। बहुत अच्छा किया कि वोटिंग का सहारा लिया। बैठक में मौजूद 19 में से 11 लोगों ने उनके खिलाफ वोट किया तो 8 लोगों ने जिनमें खुद योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण भी शामिल थे, उनके पक्ष में वोट किया। सुनने में तो ये चीजें बहुत अच्छी लगती हैं। लेकिन हकीकत ये है कि जिन सिद्धांतों और विचारधारा के आधार पर ये पार्टी बनी थी, उसमें वो हार गई। अगर 6 लोग योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के पक्ष में खड़े हैं तो यकीन मानिए एक न एक दिन ऐसा भी आएगा जब और 4-5 लोग इनके साथ जुड़ जाएंगे और फिर बाजी पलट भी सकती है। आज के फैसले के संदर्भ में ये कहना गलत न होगा कि भूषण और यादव हार गए, लेकिन क्या आम आदमी पार्टी भी अपने लाखों कार्यकर्ताओं के आगे नहीं हार गई? आज के फैसले के संदर्भ में आम आदमी पार्टी को लेकर 5 अहम सवाल उठ रहे हैं।

1. क्या आम आदमी पार्टी में संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ सवाल उठाना गलत है?

2. क्या आम आदमी पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की इजाजत नहीं है?

3. क्या आम आदमी पार्टी ने आज ये स्वीकार कर लिया है कि वहां एक आदमी एक पद की कोई मर्यादा नहीं है?

4. क्या आम आदमी पार्टी का आंतरिक लोकपाल दिखावा है, क्योंकि आंतरिक लोकपाल ने भी एक आदमी एक पद को लेकर सवाल उठाए थे?

5. क्या आम आदमी पार्टी के दो संस्थापक सदस्यों को लेकर लिए अहम फैसले में केजरीवाल की अनुपस्थिति बड़ा सवाल नहीं खड़े करती है?

लेखक हरीश चन्द्र बर्णवाल से आप इनके ईमेल के जरिये संपर्क कर सकते हैं – hcburnwal@gmail.com

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