ऑड-ईवेन : केजरीवाल की बड़ी गलती, नई मुश्‍किल में स्‍कूली बच्‍चों के पैरेंट्स?

दिल्ली में ऑड इवेन की वापसी हो रही है। अच्छी बात है वापसी होनी चाहिए, लेकिन जिस तरीके से कुछ मुद्दों पर केजरीवाल सरकार ने मेहनत नहीं की है, उससे भारी परेशानी होने वाली है।

दिल्ली में 15 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच स्कूल खुले हुए हैं। ऐसे में हजारों माता-पिता जो अपने बच्चों को अपनी गाड़ी में स्कूल छोड़ने जाते हैं, उन्हें भी ऑड इवेन से छूट दी गई है, लेकिन स्कूल में बच्चों को छोड़कर वो कैसे वापस लौटेंगे? इस बारे में न सिर्फ दिल्ली सरकार कोई समाधान नहीं ढूंढ पाई है, बल्कि साफगोई से स्वीकार कर लिया है, हम कुछ भी समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं।

1-सवाल ये है कि आखिर दिल्ली वासियों को अराजकता की स्थिति में छोड़ना क्या सही रहेगा? क्या ये बेहतर नहीं होता कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने इतने सराहनीय कदम को उठाने से पहले थोड़ी औऱ मेहनत की होती और फिर पूरी तैयारी के साथ उतरे होते। साफ है जब मां-बाप बच्चों को स्कूल में छोड़कर लौटेंगे तो उन्हें कभी भी चालाना काटा जा सकता है। इसी तरीके से स्कूल से बच्चों को लाते समय भी उन्हें पुलिस की ज्यादती सहनी पड़ सकती है।

2-दूसरा ऑड-इवेन को शुरू करने की तारीख 15 अप्रैल रखी गई है। जबकि इसी दिन रामनवमी है। देश की बहुसंख्यक लोगों की आस्था के प्रतीक इस त्यौहार के दिन गाड़ियों पर पाबंदी लगाना कहां तक सही है। जबकि सबको ये पता है कि रामनवमी के दिन हिन्दू धर्म से जुड़े श्रद्धालु दिल्ली में शोभा यात्रा निकालते हैं।

3-इस दिन कार या दोपहिया वाहनों से भी लोग इस यात्रा में शामिल होते हैं। जाहिर तौर पर न सिर्फ लोगों को परेशानी होगी, बल्कि आस्था पर भी ठेस पहुंचेगी। अभी तो विश्व हिन्दू परिषद ने ही मुख्यमंत्री केजरीवाल को इस दिन ऑड इवेन लागू न करने की गुजारिश की है, लेकिन अगर केजरीवाल सरकार रामनवमी के दिन ऑड इवेन शुरू करने के अपने फैसले पर अड़ी रहती है, तो इससे लाखों करोड़ों हिन्दूओं की आस्था को ठेस पहुंच सकती है।

3-ऑड इवेन एक बार पहले भी दिल्ली सरकार लागू कर चुकी है, लेकिन सवाल ये है कि इससे क्या कुछ हासिल हुआ। और इस बार ऑड-इवेन लागू करने के बाद दिल्ली सरकार क्या हासिल कर लेगी। इसका कोई रोडमैप नहीं रखा गया है।

जिस तरीके से दिल्ली सरकार ने ऑड-इवेन को शुरू करने और इसके मीडिया कवरेज पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वो भी बिना तैयारियों के, इससे सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि आखिर दिल्ली सरकार की मंशा क्या है? क्या वाकई दिल्ली में प्रदूषण खत्म करना सरकार की प्राथमिकता है या फिर सिर्फ इसके बहाने अपना प्रचार करना?

ये देखना भी दिलचस्प है कि जैसे ही मुख्यमंत्रियों के प्रचार करने पर रोक हटी है, केजरीवाल प्रचार के हर माध्यम में जुटे हुए दिखते हैं। बेहतर ये होता कि केजरीवाल जी थोड़ी और मेहनत करते और ऑड-इवेन को लागू कर न सिर्फ प्रदूषण से मुक्ति दिलाते बल्कि दिल्ली में गाड़ियों की लंबी लंबी कतारों से भी मुक्ति दिलाने की एक नई राह दिखाते।

लेखक हरीश चन्द्र बर्णवाल से उनके ईमेल पर संपर्क कर सकते हैं – hcburnwal@gmail.com

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