मितवा ओ मितवा…तुझको क्या डर है रे!

आज जब दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सिरी फोर्ट में अपना भाषण समाप्त किया तो उसके बाद वो तुरंत निकल नहीं गए, बल्कि वहां मौजूद लोगों से बातचीत की। उनसे घुलेमिले। यही नहीं कई लोगों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई। माहौल भावनापूर्ण था। इन सबके बीच सबसे अनोखी चीज थी बैकग्राउंड में चल रहा लगान का गाना। ‘मितवा.. ओ मितवा… तुझको क्या डर है रे.. ये धरती…अपनी है…अपना अंबर है ये’ एक बार गाना खत्म हुआ तो दूसरी बार फिर यही गाना बजने लगा।

दरअसल ये गाना, ये माहौल…अमेरिकी राष्ट्रपति का लोगों से इस तरीके से मिलना जुलना, एक संकेत है। आने वाले दिनों की मजबूत धड़कन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सियासी जिंदगी को महज तीन दिनों के घटनाक्रम से समझ सकते हैं। ये चीजें उन लोगों के लिए संकेत हैं कि जीवन में अगर हौसला हो, पॉजिटिविटी हो तो क्या कुछ नहीं किया जा सकता। लगान फिल्म संकेत है उस गुलामी मानसिकता से खुद को निकालने की, जिसे मैकाले ने पैदा किया है। मैकाले अपनी इस बात पर पूरी तरह सफल हो चुके थे कि हम एक ऐसी भारतीय नस्ल पैदा करेंगे, जो शरीर से तो भारतीय होगा लेकिन दिमाग से अंग्रेज होगा। आज जब अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने ओ मितवा गाना बजा तो ये सारे मिथक टूटते नजर आए। हमने गर्व से अपना सीना 56 इंच का होते देखा। एक अमेरिकी राष्ट्रपति आम भारतीयों के सामने ये कह रहा था कि हमारे और तुम्हारे बीच में बहुत फर्क नहीं है। हमारे पूर्वज भी मजदूर थे और तुम्हारा प्रधानमंत्री भी चाय बेचने वाला रहा है। इसका मतलब साफ था कि हम दोनों को गुलामी झेलनी पड़ी है, इसलिए खुद के हौसले को जगाओ। अगर ये हौसला जग गया तो दुनिया में कभी कोई हमें या तुम्हें नहीं सता पाएगा।

कुल मिलाकर अब तक हम भारतीय अपनी ताकत महसूस नहीं कर पाए हैं। नरेंद्र मोदी कुछ भी काम करने से पहले ये हौसला देना चाहते हैं कि हम किसी से कम नहीं हैं। बस अपने काम की मर्यादा रखो। कहीं आप अपनी मेहनत में कमजोर न होने पाएं। सच तो ये है कि जर्मनी या फिर जापान के लोगों का सिर्फ हौसला ही रहा है कि हर विश्वयुद्ध में तबाह होने के बाद वो फिर से खड़े हो गए और विकसित देश बन गए। लेकिन अंग्रेजों ने सदियों की गुलामी में हमें मानसिक तौर पर कमजोर बना दिया है, हमारे हौसले को तोड़ रखा है। आज नरेंद्र मोदी का मंत्र ये है कि अगर वो हौसला पैदा हो गया तो फिर वो जन्नत भी आपके हाथों में लाकर रख देंगे। मोदी की खासियत ये है कि वो दोस्ती में बिछ जाते हैं, लेकिन कभी सम्मान से समझौता नहीं करते। बराबरी के स्तर पर हमेशा वो चीजों को रखते हैं। दो दिन पहले मोदी ओबामा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ऐसा ही नजारा पेश हुआ। जब एक अमेरिकी पत्रकार के सवाल पर मोदी ने ओबामा के सामने साफ कहा कि भारत एक संप्रभु देश है औऱ इस संदर्भ में कभी कोई समझौता नहीं हो सकता।

दरअसल मेरी किताब “मोदी मंत्र” का ये सबसे बड़ा मंत्र है। मोदी लोगों को मानसिक रूप से बदलना चाहते हैं। आम इंसान की सोच को इतना ऊपर ले जाना चाहते हैं कि उनका हौसला बना रहे। वो कभी खुद को किसी से कमजोर न महसूस करे। वो अपने व्यापारियों, कलाकारों और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय पटल पर ले जाना चाहते हैं। इसमें कभी किसी को ये महसूस न हो कि वो अंग्रेजी में कमजोर हैं, गरीब हैं या फिर भारतीय हैं। बस आपके पास हुनर हो तो पूरी दुनिया आपके पास खिंची चली आएगी। शायद ये पहला मौका होगा जब किसी भारतीय ने या फिर मीडिया के लोगों ने ये नहीं चाहा होगा कि ओबामा हमें कुछ दे जाएंगे। किसी को भीख के तौर पर मदद मिल जाएगी। बल्कि पहली बार हमने महसूस किया कि हम बराबरी के स्तर पर एक दूसरे से लेने और देने का हौसला रखते हैं। इसलिए मुझे भरोसा है कि अगर आने वाले सालों में हम मानसिक तौर पर खुद को बदल पाएं तो यही मोदी मंत्र की सबसे बड़ी कामयाबी होगी।

लेखक हरीश चन्द्र बर्णवाल से उनके ईमेल पर संपर्क कर सकते हैं – hcburnwal@gmail.com

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